हाइकु - Hindi Haiku 1. जलता रहा लगा दियों की दुकाँ नन्हा दीपक ~ अलंकार आच्छा 2. शब्द सीढ़ियाँ - "दिल में" या "दिल से" उतरने में ! ~अलंकार आच्छा 3. छुप-छुप के ले रहा है उजाला बढ़ता चाँद ! ~ अलंकार आच्छा 4. रिजर्वेशन - कर गया कमाल पिता का नाम ~ अलंकार आच्छा 5. कब मिलेंगे ? एकलव्य को द्रोण अंगूठे संग ! ~ अलंकार आच्छा 6. मात खा गया घुसपैठिया तम फ़ौजी दीप से ! ~ अलंकार आच्छा 7. खींच ही लाया बेटे को वृद्धाश्रम माँ का अँगूठा ! ~ अलंकार आच्छा 8. हुए उद्दण्ड पत्थरबाज मेघ बरसे ओले ! ~ अलंकार आच्छा
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हाइकु - एक परिचय
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हाइकु - एक परिचय हाइकु मूलतः जापानी काव्य विधा है, जिसको तीन पंक्तियों में 5+7+5 अक्षरों के साथ पूरा करना होता है। यानी मात्र सत्रह अक्षरों वाली तीन पंक्तियों में रचनाकार को अपनी पूरी बात कहनी होती है। हाइकु की प्रथम पंक्ति में विषय उठाया जाता है, दूसरी पंक्ति में उस से सम्बंधित अथवा असंबंधित बात कहके बात को आगे भी बढ़ाया जा सकता है, या फिर कंफ्यूजन भी पैदा किया जा सकता है। लेकिन तीसरी पंक्ति को इस तरह ट्विस्ट देना होता है कि पाठक के मन-मस्तिष्क में पहली-दूसरी पंक्ति के साथ पूर्णता लिए एक साफ तस्वीर आकार ले ले। हालांकि हाइकु में तुकांत की अनिवार्यता नहीं है, लेकिन अगर सहज तुकांत बने, तो इससे परहेज भी नहीं है। ध्यान देने योग्य बात है कि एक बड़े वाक्य को 5+7+5 अक्षरों में बांटकर 3 पंक्तियों में विभक्त करके लिख देना हाइकु नहीं होता है। हाइकु में उपरोक्त सारे नियमों के साथ-साथ काव्य तत्व का होना भी अत्यंत आवश्यक है, जिसको लिखकर समझाने की बजाए, स्वयं रचना करके ही अनुभूत किया जा सकता है। मेरे द्वारा रचित "हाइकु" आप सबको इस ब्लॉग के माध्यम से प्रेषित करूँगा। आप अपनी आलोचनात्मक टिप्प...
टेलीग्राफिक संदेश के समान ही है हाइकु लिखना
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"टेलीग्राफिक संदेश के समान ही है हाइकु लिखना" मेरा मानना है कि हाइकु लिखना "टेलीग्राफिक संदेश" भेजने के समान ही है। मुझे अपने स्कूली दिनों के इंग्लिश के पेपर की याद आ रही है, जिसमें हमें बहुत बड़ा-सा संदेश देकर पूछा जाता था कि इस संदेश को तार के माध्यम से भेजने पर किस प्रकार लिखा जाएगा। बहुत सारे वाक्यों से युक्त संदेश को हमें 2 से 5 शब्दों के अंदर नियोजित करके इस प्रकार लिखना होता था कि सामने वाले तक कम से कम शब्दों में पूरा संदेश इस प्रकार पहुंच जाए कि उन्हें समझ में भी आ जाये और ज्यादा शब्द भी खर्च ना हो। ठीक वैसे ही हाइकु है। सीमित शब्दों में ज्यादा कहना। जिस तरह तार अथवा टेलीग्राफ के संदेश अत्यधिक महंगे होने की वजह से कम से कम शब्दों में ज्यादा से ज्यादा संदेश लिखे जाते थे, ठीक वैसे ही हाइकु में भी उपलब्ध वर्ण सीमा के भीतर ही पूरी बात कहनी होती है। तार में भेजे गए एक-एक शब्द की बहुत बड़ी कीमत होती थी। इसलिए किसी भी संदेश को इस तरह भेजा जाता था कि वह संदेश कम से कम शब्दों में पूरा का पूरा आ जाए और प्राप्त होने वाले को वह पूरी तरह से समझ में भी आ जाये। हाइकु में भ...